Madhya Pradesh Manikpur Village Sarpanch Road Issue

 हम।रे एक यूजर ने RVY से मुद्दा उठाया हे की मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में करकेली पंचायत में गाँव मानिकपुर में साल 2017 में लगभग 200 मीटर सीसी सड़क और नाली बनाने के लिए 12 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे ।

लेकिन आज तक गाँव में कोई सड़क नहीं दिखी।यह शिकायत जैसे ही ज़िला प्रशासन को दी गई, वहां से इसकी कार्रवाई की कोई तस्वीर सामने नहीं आई मगर सार्वजनिक रूप से रोज़गार सहायक से पता चला कि राशि सरपंच महोदय के पास है।

और जब सरपंच को पता चला की उनकी शिकायत की गयी है तो सरपंच द्वारा लोगो को म।रने की धमकी दी गयी। 

इस पंचायत के सरपंच रघुवंशी प्रताप सिंह 45 सालों से सरपंच हैं. जिन्होंने इतने सालो से गाँव की तरक्की के लिए कोई ख़ास कदम नहीं उठाए है।  ग्राम सभा में  पंच से सवाल पूछने पर भरी सभा में सरपंच महोदय द्वारा डांट कर भगा दिया जाता है।

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CM’s Chair had gone Now Sunny Deol is in Danger Now Sunny Deol is in Danger

ये है पूरा मामला

हर उम्मीदवार को चुनाव के बाद कुल खर्च का हिसाब देना होता है. चुनाव के वक्त हर कैंडिडेट एक अलग अकाउंट रखता है. यहां खर्च हो रहे पैसे का हिसाब रखता है. कैंडिडेट के अलावा चुनाव आयोग की ओर से नियुक्त अधिकारी भी इस खर्च का हिसाब रखते हैं. जिसे शैडो रिजस्टर का नाम दिया जाता है. यानी टू वे मामला है.

चुनाव आयोग उम्मीदवार की हर सभा या रैली में पोस्टर-बैनर से लेकर गाड़ियों तक के खर्च की डिटेल रखता है. चुनाव खर्च की मैक्सिमम लिमिट है 70 लाख. लेकिन चुनाव आयोग के शैडो रिजस्टर के मुताबिक सन्नी ने 86 लाख से ज्यादा खर्च किए हैं.सन्नी ने क्या कहा सन्नी देओल की ओर से जवाब आया है कि चूक उनसे नहीं, चुनाव की टीम से हुई है. सन्नी की लीगल टीम ने कहा कि उनके क्लाइंट के चुनाव खर्च का हिसाब ठीक है.

चुनाव आयोग की टीम से चूक हुई है. अगर कोई कन्फ्यूज़न है तो खर्च की सही डिटेल फिर मुहैया करा दी जाएगी.सन्नी के प्रचार में खर्च बढ़ने का अहम कारण है बड़ी रैलियां.

29 अप्रैल को गुरदासपुर में भाजपा ने बड़ी रैली की थी. 2 मई को सन्नी देओल ने रोड शो किया.

5 मई को पठानकोट में एक और बड़ी रैली हुई. इस रैली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत कई नेता हेलीकॉप्टर से पहुंचे थे. लाज़मी है खर्च बढ़ा.

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Sebi Bars Prannoy Roy and Radhika Roy to Hold Management Position in Channel – NDTV

प्रणय रॉय को सेबी ने एनडीटीवी के डायरेक्टर पद से प्रतिबंधित कर दिया है। प्रमोटर्स स्टॉक मार्केट से अगले दो सालों तक लोन भी नहीं ले सकते हैं। इसका भी प्रतिबंध है।

NDTV Channel

ख़बर एनडीटीवी से जुड़ी ज़रूर है लेकिन केवल एनडीटीवी की नहीं। ये ख़बर उन सभी के लिए है जिन्हें गौरी लंकेश की हत्या ने दुखी किया। उन सभी के लिए भी है जो देश में बढ़ रहे हेट क्राइम्स के खिलाफ बोल रहे थे, लिख रहे थे। उन सभी के लिए भी जो हिंदुत्व या इस्लाम को देश और समाज के बाद रखते हैं।

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उन सभी नवागंतुक पत्रकारों के लिए एक वॉर्निंग सायरन है जो सिद्धांतों में सहेजी हुई पत्रकारिता करने आए हैं। उन सभी पत्रकारों के लिए एक रेड सिग्नल है जो सत्ताधीशों के तंबू की नहीं बल्कि उस तंबू से उजड़े लोगों के दुख-दर्द को दिखाने को पत्रकारिता समझते हैं।

जहाँ ये ख़बर काफी लोगों के लिए दुख और चिंता का कारण है, वहीं कुछ लोगों के लिए ख़ुशी और जीत का आधार भी। मसलन, वे तमाम लोग जो नए नोटों में चिप होने की ख़बर सुनकर ख़ुश और गौरवान्वित होते थे, वे लोग, जो ये जानकर आश्चर्यचकित होते थे कि एलियन हमारे यान ले गए, वे लोग, जो न्यूज़रूम में दौड़-दौड़ कर डिबेट सेशन कंडक्ट करने वाले एंकर को देखकर सोचते थे कि यही इच भगवान है, उन सभी के लिए ये ख़बर खुशगवार है।

एनडीटीवी में तनख़्वाह की अनियमितता की ख़बरें भी सुनने में आई थी। ऐसे में इन हालातों में अब एनडीटीवी किस दिशा में आगे बढ़ेगा और कैसे – ये देखने वाला विषय होगा। पैसा ज़रूरी है। पैसे के बिना कुछ भी संभव नहीं।

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बहरहाल, अमित शाह और नरेंद्र मोदी के बारे में कहा जाता है कि ये जोड़ अपने दुश्मनों (प्रतिद्वंद्वियों) को छोड़ती नहीं। राजनैतिक पार्टियों का जो हश्र हुआ है वो हम सबने देखा। स्वतंत्र आवाज़ों (गौरी लंकेश, कलबुर्गी) की हत्या हमारे सामने की बात है। जेएनयू जैसे संस्थान का डिफेमेशन हम सबके सामने हुआ। ज़ाहिर है कि ये सब या फिर इनके शह में रहने वाले उस विचारधारा के आलोचक थे जिसके पोस्टर ब्वॉय मोदी और शाह हैं।

बचा-ख़ुचा मीडिया और स्वतंत्र पत्रकार वे दुश्मन हैं, जो पिछले कार्यकाल में साधे नहीं गए। इस बार साधे जाएँगे।

“अगला नंबर आपका है।

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Who is responsible – Lichi or the government? More than 80 children die Chamki Fever – AES in Muzaffarpur

Chamki Fever – aes in muzaffarpur claimed more than 80 lives. Some people are saying that Litchi is the reason behind Acute Encephalitis Syndrome.

But is this true? Lackluster government is a major reason behind deaths due to brain fever.

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Why did the Doctor’s refuse the warning of Mamata Banerjee in Bengal?

अगर ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ का थीम राजनैतिक होता तो वो कैसा होता इसका अंदाजा आप West Bengal और Mamata Banerjee की राजनीती से लगा सकते हैं.

बंगाल में समस्या खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है, चुनाव खत्म हो गए

जय श्री राम के नारे पर बवाल हो गया

कार्यकर्ताओं के मौत पर भी बवाल हुआ

और अब नया बखेड़ा खड़ा हो गया है. वो नया बखेड़ा क्या है ? ये नया बखेड़ा बंगाल में फ़ैल रहे जंगलराज को लेकर है.

आइए एक नजर डालते हैं, हुआ क्या

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Water Crisis in India – Dry in Madhya Pradesh and Kamalnath’s Right to water

Water Crisis in India – फिलहाल ये एक बड़ी समस्या है। Madhya Pradesh में सूखा एक बड़ी परेशानी बनी हुई है। इसी बीच Kamalnath का Right to water जल संकट को हल करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है।

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Union Minister Harsh Vardhan tweeted this secret of former Foreign Minister Sushma Swaraj

Modi gave Sushma Swaraj great responsibility Former Union Minister Sushma Swaraj is being made the governor … though A tussle has been created by Union Health Minister Dr Harshvardhan, in which he congratulated former Foreign Minister Sushma Swaraj for becoming Governor of Andhra Pradesh. However, he later deleted this tweet, causing speculation the market became hot. He wrote in a tweet, “The senior BJP leader and my sister-in-law, ex-Foreign Minister Sushma Swaraj, was delighted to be the governor of Andhra Pradesh and greetings. The people of the state will benefit from your long experience in all areas”.

 By the time Harshavardhana deleted the tweet, it had become viral. News Agency ANI posted a screenshot of their tweets. Suspense is also being said because no official announcement has been made in this regard so far. But in many states the positions of the governors are vacant. It is possible, therefore, that Sushma should be given this charge.

 

Nonetheless, let us know that this time Sushma Swaraj did not contest the Lok Sabha elections. Sushma Swaraj, one of the senior BJP leaders, is among the ministers of the previous cabinet who did not get place in the cabinet during the second term of Prime Minister Narendra Modi. Although the reason for not being involved in Swaraj’s cabinet was not being clearly stated, but due to this, his poor health was being considered. Sushma was the External Affairs Minister in the previous Cabinet of Modi Government and this time she did not contest the Lok Sabha election. He had said that his health does not allow him to contest and campaign for Lok Sabha elections.

 As a foreign minister he was very popular due to his work among the overseas Indians. Apart from this, they will also be remembered for helping many people on a tweet. During the tenure of the UPA government from 2004 to 2014, Sushma Swaraj was the Leader of Opposition in the Lok Sabha and her term was successful Install Molitics Android App:

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source: https://www.molitics.in/news/117761/sushma-swaraj-governor-A.P-harshvardhan-tweets

Prashant Kanojia and 4 journalists arrested – Yogi Adityanath Girlfriend Controversy – Mayane kya hain

“क्या उत्तर प्रदेश में तानाशाही की शुरुआत हो चुकी है? क्या बोलने वालों को ज़बान पर ताला और लिखने वालों को हथकड़ियाँ लगा लेनी चाहिए? क्या पत्रकारों को चरण वंदना के अलावा और कुछ नहीं करना चाहिए? क्या महिलाओं, बेटियों को चाहरदीवारी में ही दफ़्न हो जाना चाहिए? लानत योगी आदित्यनाथ।”रेज़ योर वॉइस सेक्शन के अंतर्गत हमारे एक यूज़र का गुस्सा इस तरह से फूटा।

इस घटना के बाद पिछले 24 घंटों में 786 लोगों ने योगी आदित्यनाथ की प्रोफाइल विज़िट की है और 81 फ़ीसदी लोगों ने योगी को डाउनवोट किया है। हमने लोगों के गुस्से को समझने का प्रयास किया। आपको बताते हैं।राहुल गाँधी की गर्लफ्रेंड के किस्से याद हैं? अदिति सिंह को लेकर जो अफ़वाहें उड़ी थी वो भी सुना होगा।

शशि थरूर की पत्नी के ऊपर मोदी जी का पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड वाला कमेंट भी ज़ेहन में होगा। शेयर वेयर भी किया होगा कइयों ने। लेकिन अब सोचना भी मत। क्योंकि आजकल ख़बर चल रही है योगी आदित्यनाथ की गर्लफ्रेंड की। ख़बर का क्या है वीडियो भी चल रही है सो देखी भी होगी। अगर देखी है तो भी सचेत रहिए।

क्योंकि इस मामले में पत्रकारों और यहाँ तक कि उनकी पत्नियों तक को हिरासत में ले लिया गया।दिल्ली के पत्रकार प्रशांत कनौजिया सबसे पहले शिकार बने। इसके बाद एक निजी चैनल की मालकिन और संपादक को गिरफ़्तार किया गया। गोरख़पुर के दो अन्य व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया। सबके ऊपर आरोप यही – कि योगी को बदनाम किया जा रहा है।अरे, बदनामी कैसी। एक महिला सचिवालय के बाहर खुद को योगी की गर्लफ्रेंड बताती है। महिला का वीडियो आता है कि योगी के साथ वीडिय कांफ्रेंसिंग पर बात करती है। जानती है कि यागी शादी नहीं कर सकते फिर भी उनके साथ रहना चाहती है।

अब ये ख़बर तो है न?ख़ैर, उत्तर प्रदेश पिछले तीन-चार दिनों में बलात्कार प्रदेश में बदल गया है। अलीगढ़, बाराबांकी, बरेली, अम्रोहा, हमीरपुर, वाराणसी, मेरठ – उत्तर प्रदेश का हर जिला लड़कियों की इज़्ज़त का कब्रगाह बन गया है। अपराध का सीना 56“` इंच हो गया है औऱ पुलिस सीएम के खिलाफ सोशल मीडिया पर लिखने वालों को डिटेन कर रही है।“बाड़ खेत खा रहे यहाँ तो गेहूँ कैसे मुस्काएगायही रहे हालात अगर तो फिर यह देश कहाँ जाएगा”

Bhindrawala is not dead, alive !!

भिंडरावाला मरा नहीं, ज़िंदा है !!

आज से करीब 35 वर्ष पूर्व देश के पंजाब प्रांत में कई दिनों से चली आ रही तनातनी का अंत हुआ था. इस दौरान करीब 400 से ज्यादा नागरिकों ने अंतिम सांस ली और करीब 80 से ज्यादा जवानों को शहीद का दर्जा दिया गया. लेकिन आज लगभग 3-4 दशकों बाद पवित्र स्थल अमृतसर दरबार साहिब में घटी उस घटना को कहानी और किस्से का रूप दे दिया गया है. हालाँकि इस किस्से में सबसे बड़ा और शुरूआती चैप्टर “Blue Star” को रखा गया, जबकि सही ढंग से यह अंतिम होना था.

जब अंत, प्रारम्भ में तब्दील हो गया !!

जो नजरअंदाज नहीं की जा सकती, वो 1977 का कांग्रेस की हार है. यहीं से कांग्रेस ने एक बीज बोया, जो आगे बढ़कर सत्ता का फल देने वाला था. लेकिन जैसे-जैसे वो वृक्ष बड़ा हुआ वो फलरूपी वृक्ष पीपल बन गया. जिससे फल की उम्मीद थी, उस वृक्ष की जटाएं दिन-ब-दिन बढ़ने लगी और वह चाहने लगा की उसे पूजा जाए. यही तत्कालीन प्रधानमंत्री को नागवार गुजरा. सही समय देख प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने पहले उसे आतंकवादी घोषित किया, फिर समय को आंकते हुए जंग का ऐलान कर दिया. शायद इसलिए भी कि लगातार बढ़ती “खालिस्तान” की मांग, जो जंग में तब्दील हो रही थी उसपर लगाम लगाया जा सके. लेकिन हुआ उल्टा. 6 जून को जंग का ऐलान कर सरकार ने तथाकथित आतंकवादी को मार तो गिराया लेकिन वहीं से “खालिस्तान” की लौ और मजबूत हो गयी. या यूँ कहा जाए जिसे सरकार अंत समझ रही थी वो प्रारम्भ था.

सच तो ये है, भिंडरावाला मरा ही नहीं है !!

ये बात सब जानते हैं की अमृतसर में उस जंग के बाद एक घोषित आतंकवादी का अंत हो गया था. लेकिन उसके बाद से ही खालिस्तान बनाने की उस मांग में और जान आ गयी. इसे स्वीकारने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. वह शायद इसलिए भी क्योंकि जो तवलीन सिंह, कुलदीप नैयार, हरि जयसिंह जैसे पत्रकारों ने समाज को और आने वाली पीढ़ियों को बताया उसे समझदारों और जिज्ञासुओं ने पिरो कर अपने विचार बना लिए. वहीं दूसरी तरफ गाँव में मौजूद बुजुर्गों की कहानियों में उस घटना को जिस तरह दर्शाया गया और आने वाली पीढ़ियों को परोसा गया, वह लुटियंस से निकलते खबरों के हेडलाइन्स से भले मिलते-जुलते थे लेकिन उनके तर्क अलग रहे और शुरू से ही उन्हें एक दिशा दी गयी. मानो कि सिर्फ तत्कालीन प्रधानमंत्री ही दोषी नहीं बल्कि उनका हीरो भिंडरावाले है.   

यहाँ भी देखें :

 गृहमंत्री के तौर पर क्यों चुने गए अमित शाह?


  सरकार व पत्रकारों के एक बड़े तबके के अनुसार भिंडरावाले की मौत के बाद शव को परिवार वालों के हवाले कर दिया गया था. लेकिन वहीं खुले आसमान में तारों के नीचे सुनाए जाने वाली कहानियों के स्वर यही कहते हैं कि “भिंडरावाले का शव सरकार को कभी मिला ही नहीं, भिंडरावाले ने तो अंतिम समय में समाधि ले ली थी” !!

आप बुद्धिमान बन सकते हैं लेकिन धर्म से बड़े नहीं !!

दो-चार किताबों व पत्रकारों की रचनाओं को पढ़ आप जानकारी इकठ्ठा तो कर सकते हैं. लेकिन धर्म से जुडी हुई चीजों में कभी भी सही नहीं हो सकते. भारत में एक बड़ा तबका है जो धर्म के नाम पर कुछ भी कर गुजरने के लिए हमेशा तैयार रहता है. ऐसा नहीं है की वो अनपढ़ है बल्कि बड़े तादाद में टाई-कोट वाले भी इसमें मौजूद हैं. अगर आप उनको समझाने की कोशिश करेंगे तो वो आपको मोड़ते हुए नेहरू और गाँधी पर ले जाएंगे और अजीबो-गरीब तर्क देंगे. आखिर में आपको तर्क के सामने घुटने टेकने होंगे और बचने के लिए बहस से दूर रहना होगा. आखिरकार किसी धर्म से जो जुड़ा है.

 केवल PM पद की नहीं, मोदी के लिए ये शपथ भी है ज़रूरी!!


  बड़े स्तर पर इसका फायदा राजनीतिक आकाँक्षाओं व अपेक्षाओं के लिए राजनैतिक पार्टियों द्वारा उठाया गया. फिर वो कश्मीर हो, राम मंदिर हो या खालिस्तान की मांग हों. इनको एक मोड़ पर धर्म, सम्प्रदाय, जाति से जोड़कर ऐसी जगह पर छोड़ दिया गया जहाँ से आगे बढ़ना असम्भव तो नहीं लेकिन कम जोखिम वाला और आसान भी नहीं है.

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The leader who prays for his defeat !!

आपने चुनावो के दौरान ऐसी कई खबरे सुनी होगी की उम्मीदवार पैसा दे के वोट मांगते है ,जबरन डरा धमका के वोट मांगने की कोशिश करते है , और हाल ही मैं ये खबर भी सुनी होगी की ज़बरदस्ती पैसा दे कर लोगो की ऊँगली पर निशान लगा दिया ताकि वो वोट न दे पाए। लेकिन, मैं जिस नेता के बारे में बताने जा रही हूँ उसका किस्सा सुन कर आप हैरान और दांग रह जाएगे .

मोदी ने उत्तर प्रदेश के इन 5 नेताओं को मंत्री नहीं “मोहरा” बनाया

तमिलनाडु के सालेम के रहने वाले डॉ. के पद्मराजन. 2018 तक 181 चुनाव लड़ चुके हैं और 20 लाख रुपए से भी अधिक नामांकन पर खर्च कर चुके हैं ,लेकिन कभी जीत नहीं सके. उन्हें तो इलाके के लोग ‘चुनावी राजा’ (Election King) के नाम से भी पुकारते हैं. वह हर बार चुनाव में हारने की दुआ करते हैं. 60 साल के पद्मराजन कभी चुनाव प्रचार में पैसे नहीं खर्च करते. उल्टा वह लोगों से मिलकर गुजारिश करते हैं कि कोई उन्हें वोट ना दे.

अब आप सोच रहे होंगे कोई उम्मीदवार या नेता ऐसा क्यों करेगा ?
दरअसल, उनकी ख्वाहिश गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराने की है. आपको जानकर हैरानी होगी कि पहले से ही 2004, 2014 और 2015 में वह सबसे अधिक चुनाव हारने वाले उम्मीदवार का रिकॉर्ड लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज है. वह चुनाव जीतने के लिए नहीं लड़ते, बल्कि अपना रिकॉर्ड बरकरार रखने के लिए चुनाव लड़ते हैं.

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अमित शाह बन गए गृहमंत्री विपक्ष में इसलिए मच रही होगी खलबली 

Modi 2.0 – इन चुनौतियों से पार पाना मोदी के लिए होगा मुश्किल 

Employment की तलाश में बनी MP Chandrani Murmu Youngest MP