Mob Lynching Increasing threat to Muslim community

हाल ही में सुर्ख़ियों में सम्प्रदायिकता का खूब बोल बाला रहा, पहले एक खबर आई जिसमे कम्युनल सर्विस के नज़रिये से रांची के जज महोदय को हिन्दू लड़की को कुरान बांटने का फैसला सुनाना भारी पड़ा और उन्हें अपना फैसला वापस लेना पड़ा। सम्प्रदायिकता के भाव को कम करने की कोशिश में ऐसा फैसला देना जज साहब की गलती बताई गयी लेकिन उसके तुरंत बाद ही बिहार से आई खबरों ने सम्प्रदियकता से बढ़ते खतरों का प्रमाण दे दिया।

पहली खबर थी कि बिहार के सारन जिले से, जहाँ तीन अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों को भैंस चुराने के आरोप में भीड़ ने इतना मारा कि उन्होंने दम तोड़ दिया। दूसरी खबर में भी मंदिर में दम्पति को चोरी के शक के चलते प्रताड़ित किया गया और इतना मारा गया की पति की मौत हो गयी।

जब मॉब लिंचिंग पर सुर्खियां गरमाई तो बिहार के CM ने बड़ी आसानी से कह दिया “लोगों ने भैंस चुराई थी ये लिंचिंग का मामला नहीं है”, शायद CM साहब के लिए भी पशु चुराना किसी इंसान की हत्या से ज्यादा बड़ा आरोप है। ऐसी ही वजह से देश में पिछले 5-6 सालों में तक़रीबन 95 मौतें हो चुकी हैं। और आए दिन भीड़तंत्र कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहा है।

source link: https://www.molitics.in/news/124018/Mob-lynching-Increasing-threat-to-Muslim-community

D Raja takes over as CPI general secretary

पूर्ववर्ती महासचिव सुधाकर रेड्डी के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद तीन दिनों तक चली पार्टी की नेशनल काउन्सिल की बैठक में पार्टी की बागडोर डी राजा को सौंप दी गयी है . कम्युनिस्ट पार्टी को अक्सर यह आलोचना झेलनी पड़ती है कि जाति के प्रश्न को ईमानदारी से संबोधित नहीं करतीं और नेतृत्व के मामले में आज भी उनके यहाँ समाज के कथित ऊंचे तबके के लोगों का दबदबा है.

source link: https://www.molitics.in/news/124212/D-Raja-takes-over-as-CPI-general-secretary

Is the Republic of Hindustan Democrat moving towards becoming a country

बीते दिनों में भाजपा के सदस्यता अभियान पर खूब ज़ोर दिया गया और पता चला की भारतीय जनता पार्टी अपनी मौजूदा सदस्य संख्या 11 करोड़ का 20 प्रतिशत यानी करीब दो करोड़ 20 लाख नए सदस्य बनाने की तैयारी कर रही है।पर सवाल यह है की जहॉं पार्टी के पास 11 करोड़ जैसी बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं वहां ऐसी योजनाओं पर focus क्यों ? आखिर दिया भी क्यों न जाए आखिर देश के गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के प्लान के मुताबिक भाजपा जहां जितने वोटों से हालिया चुनाव हारी है, उस प्रत्येक सीट से उतने ही नए सदस्य जोड़कर बूथ पर जीत पक्की करने की तैयारी है।

जिसके चलते चाहे देश में मोब लीचिंग्स हो, बेरोज़गारी अपने चर्म पर हो या प्राकृतिक आपदाओं में सरकार की lack of attention के चलते जाने जाती रहें लेकिन भाजपा का अगले चुनावों में और भारी जीत के साथ आना पक्का हो जाए। इन्ही कोशिशों के चलते खबर आती है कि चंदौली से भाजपा विधायक सुशील सिंह ने राजनीति की अजीबो गरीब पाठशाला शुरू कर दी है जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

असल में इन दिनों चल रहे भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता अभियान के तहत विधायक ने एक छात्र को भाजपा की सदस्यता दिलाकर उन्हें राजनीतिक ज्ञान दे डाला और पार्टी का पटका पहनाकर, उनको शपथ भी दिलाई। बता दें कि पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 50 लाख सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा है। खास बात यह है कि विद्यालय में पढ़ाई के बीच में विधायक सुशील सिंह ने सदस्यता अभियान चलाया। हम आपको बताते चलें की इससे पूर्व भाजपा में शामिल हुए सदस्य अल्पेश ठाकुर, स्वाति यादव, नीरज शेखावत जैसे नेता भाजपा के मुखर आलोचक थे, भाजपा ने अपनी राजनितिक चतुराई के चलते अपने आलोचकों को भी पार्टी में जगह दे दी।

अमित शाह के बयान और भाजपा नेताओं के ऐसे कदम उनकी प्राथमिकताओं को साफ़ दर्शाता है। लेकिन चिंता का विषय ये है कि किसी पार्टी का काम से ज्यादा strategy base पर सशक्तिकरण होना लोकतंत्र के लिए खतरा ना बन जाएं ? और हिंदुस्तान अपनी पूर्ण स्वतंत्रता खोकर china जैसे said to be Republic देशों की श्रेणी में ना खड़ा हो जाए?

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Why Election Commission sent TMC, NCP and CPI to ‘show cause notice’?

पिछले कुछ वर्षों में जहाँ एक तरफ भाजपा तेज़ी से आगे बढ़ी है वहीं विपक्ष का कद दिन-ब-दिन घटता चला जा रहा है। कांग्रेस और जनता दल की बदहाली के बाद हाल ही में PTI एजेंसी से खबर आई की चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC), शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) को “कारण बताओं नोटिस” जारी करने की तैयारी में है। 

चुनाव आयोग का सवाल है की पार्टियां वजह बताएं की उन्हें राष्ट्रीय पार्टी की श्रेणी में क्यों रखा जाए? बीते कुछ सालों और ख़ास कर पिछले लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाने के कारण इन पार्टियों के राष्ट्रीय पार्टी होने के दर्जे पर खतरा मंडरा रहा है।

 मौजूदा वक्त में in total 8 पार्टीज को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त है जिसमे ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), बीएसपी, सीपीआई, माकपा, कांग्रेस, एनसीपी और नेशनल पीपल्स पार्टी ऑफ मेघायल शामिल हैं । पर सवाल यह है कि इन गिनी चुनी 8 पार्टीज में से भी TMC, NCP और CPI को कारण बताओ नोटिस क्यों ?

Bihar flood When Nitish Kumar can do this, then why can not save Bihar!

Bihar वालों ने दशक से ज्यादा इन्तेजार किया तो गाना आया ‘फिर से एक बार हो, Bihar में फलाने की Government हो’ और उसको सुनते ही जनता ने Nitish Kumar को ‘फिरसे’ कुर्सी थमा दी। सोचिए, सिर्फ Nitish Kumar Title Song गाना सुनकर ही !! हालांकि उनके तथा को भी दाद देनी होगी कि जिस गांव में अस्पताल नही है, जहां खपड़ैल विद्यालय तो है लेकिन शिक्षक नही, खड़ंजा तो बन गयी है लेकिन रास्तों पर रौशनी नहीं, हर हाथ में टच इसक्रीन फ़ोन तो है लेकिन ढंग से बिजली नही, वहां भी बाबू का गाना पहुंचा। मतलब साफ है ‘तथा शक्ति’ होनी चाहिए।

source link: https://www.molitics.in/news/123513/Bihar-flood-When-Nitish-Kumar-can-do-this,-then-why-can-not-save-Bihar!

Yogi ka Uttar Pradesh kya rape Rajya ban gaya hai?

मैनपुरी में एक शादी शुदा जोड़ा मोटरसाइकिल से अपने रिश्तेदारों के घर जा रहा था रास्ते में 3 अज्ञात लोग गाड़ी को रोकते हैं, मिर्च के पाउडर को आंखों में फेकते हैं और पत्नी का अपहरण कर ले जाते हैं

पति नज़दीकी बिसवां थाना पहुंचता है और SHO रजनीश पाल गौतम से शिकायत करता है। न्याय देने के बयाज रजनीश और दो कॉन्स्टेबल पीड़ित पति को निर्ममता से पीटते हैं। 5 घंटे बाद महिला पुलिस थाने पहुंचती है और बताती है कि उसके साथ Gangrape हुआ है। 

आला अधिकारी हरकत में आते हैं और रजनीश समेत 2 कॉन्स्टेबल को निलंबित कर देते हैं पीड़त जोड़ा दलित समुदाय से है इसलिए उसे न्याय मिलने की संभावना 90% कम हो जाती है। पति ने कुरवाली थाने में गैंगरेप और लूट का मामला दर्ज़ किया और बिसवां SHO पर SC/ST के तहत मामला दर्ज़ किया गया। पुलिस की इस हरकत पर ज़्यादा चौंकिए नहीं क्योंकि वो किसी मंगल ग्रह से नहीं आई बल्कि इसी समाज का हिस्सा है, जो घोर जातिवादी और सांप्रदायिक है। 

हमारे देश में आज भी हजारों के तादाद में दलित उत्पीड़न होता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में राम राज्य होने के दावा करते हैं, लेकिन इस तरह की घटना से लगता है कि प्रदेश रेप राज्य की स्थापना हो चुकी है।

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kya sudheer chaudhary ka dna farzi hai?

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा सदन में दिए भाषण को ज़ी न्यूज़ के संपादक सुधीर चौधरी ने कॉपी-पेस्ट बताते हुए कहा कि सांसद ने अमरीकी पत्रकार मार्टिन लांगमैन के एक लेख से चुराया है, जिसके बाद मार्टिन ने खुद ट्वीट कर सुधीर चौधरी के आरोपों को ख़ारिज कर दिया। अब इस फ़जीहत पर न तो चौधरी ने माफ़ी मांगी और न चैनल ने। फेसबुक ने भी चैधरी के डीएनए कार्यक्रम को फ़र्ज़ी ख़बर का तमगा दे दिया है।

source link: https://www.molitics.in/news/121351/Is-Sudhir-Chaudhary’s-DNA-falsely-

How did the first lady presenting the Nirmala Sitharaman budget, when Indira Gandhi introduced in 1970?

तारीख थी 28 फरवरी, 1970 की, जब पहली बार किसी महिला ने देश का बजट पेश किया था. इस बजट पर सबकी निगाहें थीं, क्योंकि ये चुनावी बजट होने वाला था. 1971 के मार्च में आम चुनाव होने थे और ऐसे में इंदिरा गांधी सरकार का ये आखिरी बजट था. इसी बजट में इंदिरा गांधी ने वो चर्चित नारा दिया था गरीबी हटाओ, जिसके बाद 1971 में इंदिरा गांधी को आम चुनाव में जीत मिली थी.

चुनावी बजट होने के बावजूद इंदिरा गांधी ने कुछ कड़े फैसले लिए थे. बजट 15 पन्नों का था. # डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स बढ़ाया गया था. प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ा था, इम्पोर्ट ड्यूटी भी बढ़ाई गई थी.

# इन्कम टैक्स बढ़ाया गया था. 40 हजार रुपये सालाना की आमदनी से ऊपर इन्कम टैक्स लगाया गया था.

# सामान्य वेल्थ टैक्स में बढ़ोतरी की गई थी.

# टीवी पर ड्यूटी बढ़ाई गई थी. 20 पर्सेंट लेवी लगा दी गई थी.

# सैलरी वाले लोगों से हर महीने 250 रुपये की कटौती तय की गई थी, जो पहले 5 रुपये ही थी.

# सिगरेट पर ड्यूटी 3 फीसदी से बढ़ाकर 22 फीसदी कर दी गई थी. लेकिन इस दौरान एक बात का ध्यान रखना ज़रूरी है. वो दौर 1970 का था और अब 2019 चल रहा है. बहुत सी चीजें बदल गई हैं. देश में आर्थिक उदारीकरण है और इस लिहाज से निर्मला सीतारमण की तुलना इंदिरा से करना किसी भी हाल में ठीक नहीं होगा.

source:  https://www.molitics.in/news/121278/nirmala-sitharaman-first-women-present-budget

Meerut Migration: Another attempt to emanate the color of communalism

मेरठ में हिन्दू परिवार पलायन क्र रहे हैं. 425 परिवारों में से लगभग 125 परिवार अपना मकान बेचकर जा चुके है। मुद्दा ज़रा गंभीर नज़र आया, पडताल की तो पता चला कि ये किस्सा है मेरठ शहर के बीच स्थित लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के प्रहलाद नगर का जहाँ के रहने वाले दूसरे समुदाय के लोगों को कम दाम पर मकान बेचकर दूसरी किसी जगह पर जा रहे हैं। यहां कई मकानों व प्लाट के गेटों पर अभी भी बिकाऊ लिखा हुआ है।और  इनमें से अधिकांश मकानों की खरीद-बिक्री बीते पांच-छह वर्ष के भीतर हुई है।

इस घटना को स्थानीय भाजपा नेता व बूथ अध्यक्ष भवेश मेहता ने सांप्रदायिक रंगों में रंग दिया। भवेश मेहता ने 11 जून को नमो ऐप पर पूरे प्रकरण की जानकारी देते हुए मदद की गुहार लगाई गई थी। इसी के साथ कैराना का किस्सा दोहराने की पूरी कोशिश की गई। पूरा मेरठ इस अफवाह की चपेट में आ गया है। बात योगी आदित्यनाथ तक नहीं रुकी बल्कि भवेश मेहता ने नमो एप पर पूरे प्रकरण की जानकारी देते हुए मदद की गुहार लगाई गई थी। पीएमओ ने यूपी के मुख्यमंत्री कार्यालय को इस बारे में उचित कदम उठाने के लिए कहा गया।

यहाँ भी देखें : सरपंच की तानाशाही खा गयी गांव की सड़क

अब हम बताते हैं कि सच्चाई क्या है? अलग अलग मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार स्थानीय लोगो ने बताया कि वे अपनी मर्जी से मकान बेच रहे हैं और उन पर कोई दबाव नहीं है।मामला दो पडोसी मोहल्लों के बीच जाम और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर है और गेट लगाने को लेकर विवाद चल रहा है।लिसाड़ी गेट चौराहे पर जाम लग जाता है, जिससे लोग प्रह्लाद नगर से होकर दूसरे इलाकों में जाते हैं। इसी की वजह से एक सम्प्रदाय के लोग वहां गेट लगाना चाहते हैं, जो दूसरे समुदाय के लोग लगने नहीं देते क्योंकि इससे आम रास्ता रुक जाएगा।

मेरठ जोन के एडीजी प्रशांत कुमार और एसएसपी मेरठ नितिन तिवारी ने आज तक से बातचीत में बताया कि पलायन जैसी कोई स्थिति नहीं है। यहां पर आपसी विवाद है, उसके लिए वहां पुलिस लगाई जाएगी। साथ ही वहां सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे। इस मामले में कार्रवाई की जा रही है, लेकिन पलायन जैसी कोई स्थिति है ही नहीं।

यहाँ भी देखें : कनैक्टिंग इंडिया वाली BSNL आखिर क्यों टूट रही है?

तो सार ये है कि अधिकारी कह रहे हैं कि पलायन जैसी स्थिति नहीं है पर भाजपा नेता सांप्रदायिकता का रंग उड़ेलने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। आँख और मुँह बंद किए भोले-बाले लोग नेताओं के इस जाल में फँस भी रहे हैं। लेकिन ज़रूरी है भवेश मेहता जैसे नफ़रत के व्यापारियों की पहचान और सामाजिक रूप से उनका उचित विरोध।

source: https://www.molitics.in/article/564/meerut-communalism-politics

Meerut Migration: Another attempt to emanate the color of communalism

मेरठ में हिन्दू परिवार पलायन कर रहे हैं. 425 परिवारों में से लगभग 125 परिवार अपना मकान बेचकर पलायन कर चुके है। मुद्दा ज़रा गंभीर नज़र आया, पडताल की तो पता चला कि ये किस्सा है मेरठ शहर के बीच स्थित लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के प्रहलाद नगर का जहाँ के रहने वाले दूसरे समुदाय के लोगों को कम दाम पर मकान बेचकर दूसरी किसी जगह पर जा रहे हैं। 

यहां कई मकानों व प्लाट के गेटों पर अभी भी बिकाऊ लिखा हुआ है।और इनमें से अधिकांश मकानों की खरीद-बिक्री बीते पांच-छह वर्ष के भीतर हुई है। इस घटना को स्थानीय भाजपा नेता व बूथ अध्यक्ष भवेश मेहता ने सांप्रदायिक रंगों में रंग दिया। आँख और मुँह बंद किए भोले-बाले लोग नेताओं के इस जाल में फँस भी रहे हैं। लेकिन ज़रूरी है भवेश मेहता जैसे नफ़रत के व्यापारियों की पहचान और सामाजिक रूप से उनका उचित विरोध।

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