मेरठ
में हिन्दू परिवार पलायन क्र रहे हैं. 425 परिवारों में से लगभग 125
परिवार अपना मकान बेचकर जा चुके है। मुद्दा ज़रा गंभीर नज़र आया, पडताल की
तो पता चला कि ये किस्सा है मेरठ शहर के बीच स्थित लिसाड़ी गेट थाना
क्षेत्र के प्रहलाद नगर का जहाँ के रहने वाले दूसरे समुदाय के लोगों को कम
दाम पर मकान बेचकर दूसरी किसी जगह पर जा रहे हैं। यहां कई मकानों व प्लाट
के गेटों पर अभी भी बिकाऊ लिखा हुआ है।और इनमें से अधिकांश मकानों की
खरीद-बिक्री बीते पांच-छह वर्ष के भीतर हुई है।
इस
घटना को स्थानीय भाजपा नेता व बूथ अध्यक्ष भवेश मेहता ने सांप्रदायिक
रंगों में रंग दिया। भवेश मेहता ने 11 जून को नमो ऐप पर पूरे प्रकरण की
जानकारी देते हुए मदद की गुहार लगाई गई थी। इसी के साथ कैराना का किस्सा
दोहराने की पूरी कोशिश की गई। पूरा मेरठ इस अफवाह की चपेट में आ गया है।
बात योगी आदित्यनाथ तक नहीं रुकी बल्कि भवेश मेहता ने नमो एप पर पूरे
प्रकरण की जानकारी देते हुए मदद की गुहार लगाई गई थी। पीएमओ ने यूपी के
मुख्यमंत्री कार्यालय को इस बारे में उचित कदम उठाने के लिए कहा गया।
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अब
हम बताते हैं कि सच्चाई क्या है? अलग अलग मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार
स्थानीय लोगो ने बताया कि वे अपनी मर्जी से मकान बेच रहे हैं और उन पर कोई
दबाव नहीं है।मामला दो पडोसी मोहल्लों के बीच जाम और ट्रैफिक व्यवस्था को
लेकर है और गेट लगाने को लेकर विवाद चल रहा है।लिसाड़ी गेट चौराहे पर जाम
लग जाता है, जिससे लोग प्रह्लाद नगर से होकर दूसरे इलाकों में जाते हैं।
इसी की वजह से एक सम्प्रदाय के लोग वहां गेट लगाना चाहते हैं, जो दूसरे
समुदाय के लोग लगने नहीं देते क्योंकि इससे आम रास्ता रुक जाएगा।
मेरठ
जोन के एडीजी प्रशांत कुमार और एसएसपी मेरठ नितिन तिवारी ने आज तक से
बातचीत में बताया कि पलायन जैसी कोई स्थिति नहीं है। यहां पर आपसी विवाद
है, उसके लिए वहां पुलिस लगाई जाएगी। साथ ही वहां सीसीटीवी कैमरे भी लगाए
जाएंगे। इस मामले में कार्रवाई की जा रही है, लेकिन पलायन जैसी कोई स्थिति
है ही नहीं।
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तो
सार ये है कि अधिकारी कह रहे हैं कि पलायन जैसी स्थिति नहीं है पर भाजपा
नेता सांप्रदायिकता का रंग उड़ेलने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। आँख और मुँह
बंद किए भोले-बाले लोग नेताओं के इस जाल में फँस भी रहे हैं। लेकिन ज़रूरी
है भवेश मेहता जैसे नफ़रत के व्यापारियों की पहचान और सामाजिक रूप से उनका
उचित विरोध।
source: https://www.molitics.in/article/564/meerut-communalism-politics