Indore Eye Hospital flatters health systems

मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं का वैसे ही बुरा हाल है ऐसे में इंदौर आई हॉस्पिटल में हुई ये अमानवीय घटना जिसमे 11 मरीजों ने अपनी आँखे गवाँ दी प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की धज्जियाँ उड़ा देती है। दिसंबर 2010 में भी इस अस्पताल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया था, जिसमें 18 लोगों की रोशनी चली गई थी।उस समय भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया जिसका खामियाजा आज 11 मरीजों को भुगतना पड़ा।

There are 69000 teachers recruitment in Uttar Pradesh?

उत्तर प्रदेश में लटकी हैं 69000 शिक्षकों की भर्तियाँ ?

 उत्तर प्रदेश 69000 शिक्षकों की भर्तियाँ लटकी हुई हैं। 68500 शिक्षकों की भर्तियाँ भी अभी पूरी नहीं हुई हैं। 23117 पद अब तक खाली हैं जिन पर कुछ भी स्पष्ट नहीं है। आदित्यनाथ ने खुद कहा था कि राज्य में प्राइमरी 97000 शिक्षकों की कमी है। क्या सरकार की जिम्मेदारी नहीं कि वो भर्तियाँ जल्दी पूरी करे?

 

E-Posh Nigal Rahi Gareebo ke do wakt ki Roti

E-Posh Nigal Rahi Gareebo ke do wakt ki Roti

E-Posh निगल रही गरीबों के दो वक्त की रोटी

खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के तहत ई-पॉश मशीन के ज़रिये कार्ड धारक के अंगूठे से मिलान करके खाद्यान्न दिया जाएगा जिससे सरकार के अनुसार राशन की काला बाजारी काफी हद तक रोकी जा सकती है। लेकिन नेटवर्किंग समस्या के कारण लोगों के लिए ये सुविधा उल्टा जी का जंजाल बनी हुई है।

source link: https://www.molitics.in/news/128523/e-posh-uttar-pradesh

Automobile Crisis maruti suzuki

Automobile Crisis: मारुती सुजुकी ने 3000 अस्थायी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में बाज़ार में बढ़ रही मंदी आम आदमी के लिए परेशानी की वजह बनी हुई है। शेयर बाज़ार पिछले 14 सालों में सबसे ज्यादा मंदी पर है, कंपनियों की सेल में भारी गिरावट है और अगर specifically ऑटोमोबाइल companies की बात करें तो उनकी औसतन सेल में 15-20% गिरावट है।

 

When will the good days of farmers come?

5 aug को जब पूरा देश कश्मीर की चर्चा में व्यस्त था तब महाराष्ट्र के अकोला में राजमार्ग परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहित किए जाने के बाद मुआवजा मिलने में देरी से तंग आकर जिला कलेक्ट्रेट में पांच किसानों ने जहर खा लिया। ऐसा महाराष्ट्र में पहली बार ही नहीं हुआ है। 

महाराष्ट्र में कर्ज से परेशान किसान लगातार आत्महत्या कर रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले चार साल यानि वर्ष 2015 से 2018 तक राज्य में 12,021 किसानों ने आत्महत्या की है।इस साल जनवरी से मार्च तक ही 610 किसानों ने आत्महत्या कर ली है। ऐसे में राज्य सरकार की योजनाओं पर सवाल उठना लाज़मी है।

JNU administration landed on dictatorship under CCS rules

जेएनयू प्रशासन द्वारा 48 शिक्षकों के प्रदर्शन को लेकर दिए नोटिस के मामले में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन और शिक्षक संघ अब आमने-सामने आ गए है।साथ ही शिक्षक संघ ने जेएनयू प्रशासन पर ये भी आरोप लगाया है कि प्रशासन लगातार आरक्षण नीति के उल्लंघन, जबरन अटेंडेंस पॉलिसी को लागू करने, मनमाने तरीके से विभागों के अध्यक्षों और डीनों की नियुक्ति और उन्हें हटाने, शिक्षकों को परेशान करने जैसे जेएनयू विरोधी कदम उठाता रहा हैं।

source link: https://www.molitics.in/news/127502/JNU-administration-landed-on-dictatorship-under-CCS-rules

Some big announcements by Kejriwal to win Delhi Arvind Kejriwal

दिल्ली में विधानसभा के चुनाव जैसे जैसे नज़दीक आ रहे है वैसे-वैसे राजनितिक पार्टियां जनता को लुभाने की कोशिश में लगी हुई है और इस रेस में सबसे आगे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल नज़र आ रहे है.

 केजरीवाल ने पिछली बार चुनाव से पहले मुफ्त पानी का तोहफा दिल्ली के लोगों को दिया था और लोगों ने रिटर्न गिफ्ट में दिल्ली की सत्ता उन्हें सौंप दी. एक बार फिर से अरविंद केजरीवाल अपना पुराना दाव खेल रहे हैं। फिर से केजरीवाल ने दिल्ली की जनता को लुभाने के लिए कुछ ऐलान किये हैं। आइये नज़र डालते हैं कुछ मुख्य घोषणाओं पर

Atal ke BJP aur Maujooda BJP me kya Badla

‘चरित्र’ की कमजोर भाजपा, ‘लक्ष्य की मजबूत’ है !

‘अपने लक्ष्य पर डटे रहना बड़ी बात है’

पिछले दिनों एक खत मिला और उसमें यही बात लिखी थी. फिर तुम्हारा लक्ष्य बाल हो, बारू हो या फिर लादेन ही क्यों नहीं. बस डेट रहो और निशाना साधो.

फिर जीत मिले या हार मिले 
इसपर कोई ऐतबार नहीं 
राह तुम कोई चुनों, बस डटे रहो
फिर देखो, तुम जैसा कोई मझधार नहीं.

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370 हटाने के बाद लोग कश्मीर पर चर्चा कर रहे हैं. किसी की तीखी टिपण्णी है, तो कोई व्यंग कर रहा और बचे-खुचे ‘ललकार’ रहे हैं. 5 अगस्त 2019 को जो भी हुआ उसपर टिपण्णी करना और अपनी राय रखना मैं नादानी, नासमझी और बचकानी हरकत से तौलता हूँ. इसलिए मैं लेख में कश्मीर के संदर्भ में ‘मौजूदा भाजपा’ की बात करूँगा. चर्चे में कश्मीर ज़रूर होगा लेकिन विषय केंद्रित भाजपा पर होगा. 

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‘भाजपा’ पर ही क्यों ?

दरसल हमने वो दौर देखा. जब भाजपा राम मंदिर और कश्मीर को लकेर आगे बढ़ती रही, कांग्रेस को दोबारा सरकार बनाते देखा फिर केजरीवाल को उगते और फिसलते देखा. उसके बाद मोदी लहर और अब दोबारा भाजपा की सरकार देख रहे हैं. इस दौरान कई चीजे हुई. कई सुर बदले और बिखरे. लेकिन कोई तो था जो ‘अस्थाई’ नहीं था ठीक 370 की तरह. बल्कि उसका निशाना एक ही जगह टिका हुआ था. तो वो थी, भाजपा. इसलिए विषय केंद्रित भाजपा पर ही रहेगा. 

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‘भाजपा’ ही थी जो डटी रही !

देखा जाए तो अटल वाले भाजप से मौजूदा भाजपा में बहुत बदलाव हुआ. अटल जबान के तेज थे और शाह दिमाग के हैं. अटल संसद में लड़कर जीतने की छमता रखे थे और अमित लड़ाकर जीतना जानते हैं. अटल इतिहास के दमपर आवाज उठाते थे और अमित इतिहास को खत्म कर आवाज दबाना जानते हैं. अटल सत्ता के भूखे नहीं थे, अमित सत्ता से भूख मिटाते हैं. इतना बदलाव हुआ राम मंदिर वाले आंदोलन से निकले भाजपा और मौजूदा भाजपा में लेकिन ‘लक्ष्य’ अभी भी वही है !

राम मंदिर वही बनाएँगे, 370 भी हटाएंगे.

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‘केजरी’ कमाल कर सकता था !

जनता महंगाई से जूझ रही थी. कांग्रेस की दूसरी सरकार घोटालों से घिरी थी. तभी एक गुट राजनीती में आती है. जनता उम्मीद की किरण मान उसके साथ चलने को तैयार हो जाती है. आम आदमी पार्टी के पास भी एक मौका था राजनीति बदलने का, युवाओं के लिए मिसाल पेश करने का, की सच और सही तरीके से भी राजनीति की जा सकती है. उम्मीदन केजरीवाल ने सरकार बनने के बाद ‘विकास’ की असल तस्वीर तो दिखाई लेकिन जिस शिला दीक्षित के सामने वो लड़े, उनको हराया और विधानसभा से बहार का रास्ता दिखाया. लोकसभा के दौरान ऐसी क्या नौबत आ गयी की उसी कांग्रेस के सामने गिड़गिड़ाना पड़ा, जिस सिस्टम के खिलाफ लड़कर वो खड़े हुए थे. 

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और आज ‘कश्मीर’ पर सहमति जताई. मैं यह नहीं कह रहा की केजरीवाल गलत हैं या सही लेकिन अपने ‘लक्ष्य’ पर टिकने वाले नहीं हैं. यह तो उन्होंने साबित कर दिया. क्योंकि जो व्यक्ति खुद ‘पूर्ण राज्य’ की लड़ाई लड़ रहा हो और फिर वो किसी प्रदेश को विभाजित कर ‘केंद्र शाषित प्रदेश’ बनाने के आदेश का समर्थन करे तो वो ज़रूर उन्हीं चाचियों की हरकतों जैसा है, जो अपने बेटे के खरोच को ज़ख्म और दूसरे के बच्चे के ज़ख्म को ‘जरा सा खरोच’ में आंकती हैं.  

पहले कालिख, फिर अंडे और अब थूक चाटने चल दिए केजरीवाल !! धिक्कार है

इसलिए देश में कोई पार्टी अपने विचारो, सिद्धांतों व लक्ष्य पर अडिग है तो वो भाजपा ही है. फिर फैसला सही हो या गलत, तानाशाही हो या परिणाम नरसंहार. टिके रहे, अड़े रहे और डटे रहे. 

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