Kya Sapana Chaudhary ke BJP mein sadasyata le lene se Badalegi Bhajapa Netaon ki soch?

सपना चौधरी- हरियाणा के खुले मंचों पर सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली कलाकारों में से एक हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों में इनकी चर्चा सियासत के मैदानों में अधिक हुई है। लोकसभा चुनावों से पहले अटकले आई की सपना कांग्रेस में शामिल हो सकती हैं, इसके बाद भाजपा नेता अश्विनी कुमार चोपड़ा और सुरेंद्र सिंह ने उनका परिचय दिया था। 

अश्विनी कुमार चोपड़ा ने सपना चौधरी को ठुमके लगाने वाली कहा था और भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ने उनके काम पर सवाल खड़े कर कहा कि उनका पेशा नाचना, गाना है।उन्होंने राहुल गांधी को संबोधित करते हुए कहा कि जैसे आप के पिता स्वर्गीय राजीव गांधी ने सोनिया गांधी को अपना बना लिया, वैसे ही आप भी डांसर सपना चौधरी को अपना बना लें।

पर अब जब वही सपना चौधरी भाजपा के देशव्यापी सदस्यता अभियान से जुड़ने वाली पहली सदस्य हैं तो सब मौन हैं।किसी भी नेता को उनसे कोई शिकायत नहीं।यहाँ सवाल भाजपा नेताओं से है कि क्या अब भी उन्हें सपना चौधरी के नाचने गाने से दिक्कत है ? या केवल क्या भाजपा में सदस्यता ले लेने से सपना को लेकर भाजपा नेताओं की सोच बदल गई है ?

source: https://www.molitics.in/news/122033/sapana-chaudhary-entry-in-bjp

kya sudheer chaudhary ka dna farzi hai?

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा सदन में दिए भाषण को ज़ी न्यूज़ के संपादक सुधीर चौधरी ने कॉपी-पेस्ट बताते हुए कहा कि सांसद ने अमरीकी पत्रकार मार्टिन लांगमैन के एक लेख से चुराया है, जिसके बाद मार्टिन ने खुद ट्वीट कर सुधीर चौधरी के आरोपों को ख़ारिज कर दिया। अब इस फ़जीहत पर न तो चौधरी ने माफ़ी मांगी और न चैनल ने। फेसबुक ने भी चैधरी के डीएनए कार्यक्रम को फ़र्ज़ी ख़बर का तमगा दे दिया है।

source link: https://www.molitics.in/news/121351/Is-Sudhir-Chaudhary’s-DNA-falsely-

How did the first lady presenting the Nirmala Sitharaman budget, when Indira Gandhi introduced in 1970?

तारीख थी 28 फरवरी, 1970 की, जब पहली बार किसी महिला ने देश का बजट पेश किया था. इस बजट पर सबकी निगाहें थीं, क्योंकि ये चुनावी बजट होने वाला था. 1971 के मार्च में आम चुनाव होने थे और ऐसे में इंदिरा गांधी सरकार का ये आखिरी बजट था. इसी बजट में इंदिरा गांधी ने वो चर्चित नारा दिया था गरीबी हटाओ, जिसके बाद 1971 में इंदिरा गांधी को आम चुनाव में जीत मिली थी.

चुनावी बजट होने के बावजूद इंदिरा गांधी ने कुछ कड़े फैसले लिए थे. बजट 15 पन्नों का था. # डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स बढ़ाया गया था. प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ा था, इम्पोर्ट ड्यूटी भी बढ़ाई गई थी.

# इन्कम टैक्स बढ़ाया गया था. 40 हजार रुपये सालाना की आमदनी से ऊपर इन्कम टैक्स लगाया गया था.

# सामान्य वेल्थ टैक्स में बढ़ोतरी की गई थी.

# टीवी पर ड्यूटी बढ़ाई गई थी. 20 पर्सेंट लेवी लगा दी गई थी.

# सैलरी वाले लोगों से हर महीने 250 रुपये की कटौती तय की गई थी, जो पहले 5 रुपये ही थी.

# सिगरेट पर ड्यूटी 3 फीसदी से बढ़ाकर 22 फीसदी कर दी गई थी. लेकिन इस दौरान एक बात का ध्यान रखना ज़रूरी है. वो दौर 1970 का था और अब 2019 चल रहा है. बहुत सी चीजें बदल गई हैं. देश में आर्थिक उदारीकरण है और इस लिहाज से निर्मला सीतारमण की तुलना इंदिरा से करना किसी भी हाल में ठीक नहीं होगा.

source:  https://www.molitics.in/news/121278/nirmala-sitharaman-first-women-present-budget

Does the budget of BMC be spent on Matoshree’s writing?

मुंबई में भीषण बारिश के चलते जल-जीवन अस्त-व्यस्त होगया। कई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 35-40 लोगों की मारे जाने की बात सामने आरही है। शिवसेना मुखपत्र ने अपने लेख में कहा कि जब भी ऐसा होता है, तब शिवसेना की आलोचना करना फैशन हो जाता है।

एशिया की सबसे अमीर महानगर पालिका का 30000 करोड़ का बजट क्या मातोश्री की लिपाई-पोताई पर ख़र्च होता है?

source link: https://www.molitics.in/news/121114/mumbai-monsoon-heavily-rains

113 story of Muslim children to be taken off the train

113 मुस्लिम बच्चों को ट्रेन से नीचे उतारने की कहानी

मेरठ में हिन्दू परिवार पलायन कर रहे हैं. 425 परिवारों में से लगभग 125 परिवार अपना मकान बेचकर पलायन कर चुके है। मुद्दा ज़रा गंभीर नज़र आया, पडताल की तो पता चला कि ये किस्सा है मेरठ शहर के बीच स्थित लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के प्रहलाद नगर का जहाँ के रहने वाले दूसरे समुदाय के लोगों को कम दाम पर मकान बेचकर दूसरी किसी जगह पर जा रहे हैं। 

यहां कई मकानों व प्लाट के गेटों पर अभी भी बिकाऊ लिखा हुआ है।और इनमें से अधिकांश मकानों की खरीद-बिक्री बीते पांच-छह वर्ष के भीतर हुई है। इस घटना को स्थानीय भाजपा नेता व बूथ अध्यक्ष भवेश मेहता ने सांप्रदायिक रंगों में रंग दिया। आँख और मुँह बंद किए भोले-बाले लोग नेताओं के इस जाल में फँस भी रहे हैं। लेकिन ज़रूरी है भवेश मेहता जैसे नफ़रत के व्यापारियों की पहचान और सामाजिक रूप से उनका उचित विरोध।

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Meerut Migration: Another attempt to emanate the color of communalism

मेरठ में हिन्दू परिवार पलायन क्र रहे हैं. 425 परिवारों में से लगभग 125 परिवार अपना मकान बेचकर जा चुके है। मुद्दा ज़रा गंभीर नज़र आया, पडताल की तो पता चला कि ये किस्सा है मेरठ शहर के बीच स्थित लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के प्रहलाद नगर का जहाँ के रहने वाले दूसरे समुदाय के लोगों को कम दाम पर मकान बेचकर दूसरी किसी जगह पर जा रहे हैं। यहां कई मकानों व प्लाट के गेटों पर अभी भी बिकाऊ लिखा हुआ है।और  इनमें से अधिकांश मकानों की खरीद-बिक्री बीते पांच-छह वर्ष के भीतर हुई है।

इस घटना को स्थानीय भाजपा नेता व बूथ अध्यक्ष भवेश मेहता ने सांप्रदायिक रंगों में रंग दिया। भवेश मेहता ने 11 जून को नमो ऐप पर पूरे प्रकरण की जानकारी देते हुए मदद की गुहार लगाई गई थी। इसी के साथ कैराना का किस्सा दोहराने की पूरी कोशिश की गई। पूरा मेरठ इस अफवाह की चपेट में आ गया है। बात योगी आदित्यनाथ तक नहीं रुकी बल्कि भवेश मेहता ने नमो एप पर पूरे प्रकरण की जानकारी देते हुए मदद की गुहार लगाई गई थी। पीएमओ ने यूपी के मुख्यमंत्री कार्यालय को इस बारे में उचित कदम उठाने के लिए कहा गया।

यहाँ भी देखें : सरपंच की तानाशाही खा गयी गांव की सड़क

अब हम बताते हैं कि सच्चाई क्या है? अलग अलग मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार स्थानीय लोगो ने बताया कि वे अपनी मर्जी से मकान बेच रहे हैं और उन पर कोई दबाव नहीं है।मामला दो पडोसी मोहल्लों के बीच जाम और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर है और गेट लगाने को लेकर विवाद चल रहा है।लिसाड़ी गेट चौराहे पर जाम लग जाता है, जिससे लोग प्रह्लाद नगर से होकर दूसरे इलाकों में जाते हैं। इसी की वजह से एक सम्प्रदाय के लोग वहां गेट लगाना चाहते हैं, जो दूसरे समुदाय के लोग लगने नहीं देते क्योंकि इससे आम रास्ता रुक जाएगा।

मेरठ जोन के एडीजी प्रशांत कुमार और एसएसपी मेरठ नितिन तिवारी ने आज तक से बातचीत में बताया कि पलायन जैसी कोई स्थिति नहीं है। यहां पर आपसी विवाद है, उसके लिए वहां पुलिस लगाई जाएगी। साथ ही वहां सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे। इस मामले में कार्रवाई की जा रही है, लेकिन पलायन जैसी कोई स्थिति है ही नहीं।

यहाँ भी देखें : कनैक्टिंग इंडिया वाली BSNL आखिर क्यों टूट रही है?

तो सार ये है कि अधिकारी कह रहे हैं कि पलायन जैसी स्थिति नहीं है पर भाजपा नेता सांप्रदायिकता का रंग उड़ेलने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। आँख और मुँह बंद किए भोले-बाले लोग नेताओं के इस जाल में फँस भी रहे हैं। लेकिन ज़रूरी है भवेश मेहता जैसे नफ़रत के व्यापारियों की पहचान और सामाजिक रूप से उनका उचित विरोध।

source: https://www.molitics.in/article/564/meerut-communalism-politics

Meerut Migration: Another attempt to emanate the color of communalism

मेरठ में हिन्दू परिवार पलायन कर रहे हैं. 425 परिवारों में से लगभग 125 परिवार अपना मकान बेचकर पलायन कर चुके है। मुद्दा ज़रा गंभीर नज़र आया, पडताल की तो पता चला कि ये किस्सा है मेरठ शहर के बीच स्थित लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के प्रहलाद नगर का जहाँ के रहने वाले दूसरे समुदाय के लोगों को कम दाम पर मकान बेचकर दूसरी किसी जगह पर जा रहे हैं। 

यहां कई मकानों व प्लाट के गेटों पर अभी भी बिकाऊ लिखा हुआ है।और इनमें से अधिकांश मकानों की खरीद-बिक्री बीते पांच-छह वर्ष के भीतर हुई है। इस घटना को स्थानीय भाजपा नेता व बूथ अध्यक्ष भवेश मेहता ने सांप्रदायिक रंगों में रंग दिया। आँख और मुँह बंद किए भोले-बाले लोग नेताओं के इस जाल में फँस भी रहे हैं। लेकिन ज़रूरी है भवेश मेहता जैसे नफ़रत के व्यापारियों की पहचान और सामाजिक रूप से उनका उचित विरोध।

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Madhya Pradesh Manikpur Village Sarpanch Road Issue

 हम।रे एक यूजर ने RVY से मुद्दा उठाया हे की मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में करकेली पंचायत में गाँव मानिकपुर में साल 2017 में लगभग 200 मीटर सीसी सड़क और नाली बनाने के लिए 12 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे ।

लेकिन आज तक गाँव में कोई सड़क नहीं दिखी।यह शिकायत जैसे ही ज़िला प्रशासन को दी गई, वहां से इसकी कार्रवाई की कोई तस्वीर सामने नहीं आई मगर सार्वजनिक रूप से रोज़गार सहायक से पता चला कि राशि सरपंच महोदय के पास है।

और जब सरपंच को पता चला की उनकी शिकायत की गयी है तो सरपंच द्वारा लोगो को म।रने की धमकी दी गयी। 

इस पंचायत के सरपंच रघुवंशी प्रताप सिंह 45 सालों से सरपंच हैं. जिन्होंने इतने सालो से गाँव की तरक्की के लिए कोई ख़ास कदम नहीं उठाए है।  ग्राम सभा में  पंच से सवाल पूछने पर भरी सभा में सरपंच महोदय द्वारा डांट कर भगा दिया जाता है।

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Journalist Prashant Kanaujia is now on the Molitics

देश के सभी प्रमुख मुद्दो पर और सरकार से सवाल करने प्रशांत कनौजिया अब आ रहे हैं मोलिटिक्स पर, जहाँ सत्ता की तारीफ़ नहीं बल्कि सत्ता से तीखे सवाल पूछे जाएगें और सत्ता पर होगी सवालों की बमबारी। 

source link:  https://www.molitics.in/news/120064/prashant-kanojia-on-molitics

Did BSNL get access to reality due to Jio?

क्या Jioकी वजह से BSNL पंहुचा घाटे में -जानिए सच्चाई

BSNL जिसका टैगलाइन था – कनैक्टिंग इंडिया वो इस तरह टूटेगा शायद ही किसी ने सोचा था। 3G तक की प्रतिस्पर्धा में ठीक ठाक बनी रही BSNL 4G के दौर में मरणासन्न हो गई है। नौबत ये है कि 1 लाख 76 हज़ार कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए BSNL के पास पैसा नहीं है।

सरकार के आगे हाथ पसारे BSNL कैश देने की गुहार लगा रही है।आखिर क्या कारण है कि 2000-2009 तक लगातार फ़ायदे में रही ये संस्था साल-दर-साल नुकसान झेलने लगी। लाखों युवा जिस नौकरी के सपने देखते हैं, आख़िर क्यों वहाँ के कर्मचारी बहाने पर मजबूर हैं? दरअसल सारा खेल शुरू होता है 2007-08 से। BSNL को 2600 MHz फ्रीक्वेंसी पर BWA (Broadband Wireless Access) मिला।2010 में सरकार ने 4G नेटवर्क के लिए नीलामी शुरू की। ये नीलामी 2300 MHz फ्रीक्वेंसी के लिए की गई। इसके बाद एयरटेल ने 2012 में LTE Network पर 4G सेवाएँ शुरू की।

BSNL ने सरकार को कहा कि उसे मिली 2600 MHz फ्रीक्वेंसी पर LTE Network के ज़रिए काम नहीं हो पाएगा। BSNL 2011 के बाद से 2600 MHz फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम वापिस कर रिफंड का गुहार करने लगी।

सरकार ने 2014 में BSNL को रिफंड दिया। ये रिफंड ऑपरेशनल खर्चों को चलाने के लिए और पहले से मौजूद 2G और 3G को मजबूत करने के लिए दिया गया। लेकिन अब तक टेलीकॉम सेक्टर की तस्वीर बदल चुकी थी।4G के आने के बाद, जियो का लगभग एकछत्र राज्य शुरू हो गया। और साथ ही शुरू हो गया बाकी टेलीकॉम कंपनियों का अवसान।

बाज़ार में BSNL की कुल हिस्सेदारी मात्र 10 फ़ीसदी रह गई है। नीति आयोग ने BSNL को बंद करने का प्रस्ताव दिया लेकिन सरकार ने उसे ख़ारिज़ कर दिया।अब देखना महत्वपूर्ण होगा, कि सरकार अपने इस उपक्रम के बारे में क्या सोच रही है? जियो के प्रचार में मुख्य रूप से दिखने वाले मोदी सरकार का ध्यान उन 1 लाख 76 हज़ार कर्मचारियों की तरफ है, जिनका भविष्य BSNL की ख़स्ता माली हालत के कारण अधर में लटकी है?

source: https://www.molitics.in/news/119898/why-bsnl-is-in-loss