कृषि संकट का निवारण करने के बजाए सरकार किसानों के आत्महत्या के रिकॉर्ड को छुपा रही है। किसानों के आत्महत्या से जुड़े तथ्यों को जानने के लिए देखें यह वीडियो।
अगर
आपकी दाढ़ी खास करीने से बढ़ी हुई है, आप मूँछ नहीं रखते और सिर पर खास
टोपी पहनते हैं; मतलब अगर आप सीधे तौर पर मुसलमान दिखते हैं, तो कभी भी और
कहीं भी एक भीड़ आपको रोक सकती है। आपका नाम पूछ सकती है। आपकी टोपी
उतारकार फेंक सकती है और आपसे जबरन जय श्री राम के नारे लगवा सकती है। आपको
ये नारा लगाना पड़ेगा। नहीं लगाएँगे तो मारे जाएंगे। दोहरा चरित्र ये है
कि मुसलमानों को टोपी फेंकने के लिए मजबूर करने वाली भीड़ में वो लोग भी
शामिल होते होंगे जिन्हें फिल्म केसरी में अक्षय कुमार द्वारा पगड़ी न
उतारने की ज़िद पागल बना गई थी।
मोदी
साहब के पीएम बनने के बाद की घटनाओं में उपर की बातें बहुत कॉमन हैं।
पश्चिम बंगाल हो या हरियाणा, बिहार हो या झारखंड, महाराष्ट्र हो या उत्तर
प्रदेश लगभग हर राज्य में जय श्री राम का नारा हिंसा का आधार बना।
क्या
जय श्री राम एक आध्यात्मिक/ऐतिहासिक संबोधन है? अगर आप अभिवादन के शब्दों
के ऐतिहासिक सफर के बारे में पढ़ेंगे तो पाएँगे कि आपने राम-राम सुना होगा,
जय सिया-राम सुना होगा या फिर जय राम जी की सुना होगा। जय श्री राम
अभिवादन का शब्द कभी नहीं रहा।
जय
श्री राम का नारा लोकप्रिय हुआ रामानंद सागर के सीरियल रामयण से। जब
राम-रावण युद्ध के दौरान हनुमान राम की वानरी सेना के उत्साह को बढ़ाने के
लिए जय श्री राम बोलते थे और समस्त वानरी सेना पुनरावृत्ति में जय श्री राम
का उद्धोष करती थी। ये 1980 का दौर था।
इसी
दौर में विश्व हिंदू परिषद देश पर हिंदुत्व का रंग चढ़ाने की कोशिशें कर
रही थी। लोकप्रिय धारावाहिक से निकला एक लोकप्रिय नारा विहिप का राजनैतिक
नारा बन गया। जय श्री राम को राम जन्मभूमि आंदोलन में जमकर प्रयोग किया
गया। भगवा वेश धरे हुए हिंदुत्ववादियों के हाथों में हथियार और मुँह पर जय
श्री राम के ओजस्वी नारे से आई आक्रामक लालिमा हिंदुत्व की सिग्नेचर इमेज
बन गई।
1990-92
के दौर में यह नारा बीजेपी ने ज़ोरों-शोरों से अपनाया। फिर चुनाव-दर-चुनाव
जय श्री राम गूँजता रहा और बीजेपी का ग्राफ बढ़ता रहा। बीजेपी ने एक ऐसे
वोटबैंक का निर्माण कर लिया जिसकी रीढ़ हिंदू आस्था प्रतीक राम थे। 2014
में मोदी सत्ता की केंद्र में आए और इसके बाद से जय श्री राम नारे की
उग्रता बढ़ी। 2019 में मोदी दोबारा आए लेकिन जिस ऐतिहासिक मैनडेट के साथ
मोदी आए उससे कहीं अधिक उग्रता के साथ जय श्री राम का नारा राजनैतिक पटल पर
उभरा।
जय
श्री राम के नारे के साये में हिंसा पलने लगी, लोग मरने लगे, बीजेपी के
विपक्षी इस साये में कमज़ोर होने लगे। यूट्यूब, ट्विटर औऱ फेसबुक पर जय
श्री राम के साथ भड़काऊ कंटेंट जमकर फैलाया जा रहा है। हिंदुत्ववादी
संगठनों ने लोगों के मन से जय श्री राम नारे के प्रति आदर का भाव छीनकर डर
के भाव से भर दिया है। आज जय श्री राम आदर की नहीं बल्कि डर की निशानी हैं।
हालात ऐसे हैं कि अगर खुद राम आकर कहें कि मेरे नाम पर हिंसा मत फैलाओ, तो
ये उन्मादी भीड़ राम की भी मॉब लिंचिंग कर दे।
हाल ही में सुर्ख़ियों में सम्प्रदायिकता का खूब बोल बाला रहा, पहले एक खबर आई जिसमे कम्युनल सर्विस के नज़रिये से रांची के जज महोदय को हिन्दू लड़की को कुरान बांटने का फैसला सुनाना भारी पड़ा और उन्हें अपना फैसला वापस लेना पड़ा। सम्प्रदायिकता के भाव को कम करने की कोशिश में ऐसा फैसला देना जज साहब की गलती बताई गयी लेकिन उसके तुरंत बाद ही बिहार से आई खबरों ने सम्प्रदियकता से बढ़ते खतरों का प्रमाण दे दिया।
पहली खबर थी कि बिहार के सारन जिले से, जहाँ तीन अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों को भैंस चुराने के आरोप में भीड़ ने इतना मारा कि उन्होंने दम तोड़ दिया। दूसरी खबर में भी मंदिर में दम्पति को चोरी के शक के चलते प्रताड़ित किया गया और इतना मारा गया की पति की मौत हो गयी।
जब मॉब लिंचिंग पर सुर्खियां गरमाई तो बिहार के CM ने बड़ी आसानी से कह दिया “लोगों ने भैंस चुराई थी ये लिंचिंग का मामला नहीं है”, शायद CM साहब के लिए भी पशु चुराना किसी इंसान की हत्या से ज्यादा बड़ा आरोप है। ऐसी ही वजह से देश में पिछले 5-6 सालों में तक़रीबन 95 मौतें हो चुकी हैं। और आए दिन भीड़तंत्र कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहा है।
पूर्ववर्ती महासचिव सुधाकर रेड्डी के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद तीन दिनों तक चली पार्टी की नेशनल काउन्सिल की बैठक में पार्टी की बागडोर डी राजा को सौंप दी गयी है . कम्युनिस्ट पार्टी को अक्सर यह आलोचना झेलनी पड़ती है कि जाति के प्रश्न को ईमानदारी से संबोधित नहीं करतीं और नेतृत्व के मामले में आज भी उनके यहाँ समाज के कथित ऊंचे तबके के लोगों का दबदबा है.
बीते दिनों में भाजपा के सदस्यता अभियान पर खूब ज़ोर दिया गया और पता चला
की भारतीय जनता पार्टी अपनी मौजूदा सदस्य संख्या 11 करोड़ का 20 प्रतिशत
यानी करीब दो करोड़ 20 लाख नए सदस्य बनाने की तैयारी कर रही है।पर सवाल यह
है की जहॉं पार्टी के पास 11 करोड़ जैसी बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं
वहां ऐसी योजनाओं पर focus क्यों ? आखिर दिया भी क्यों न जाए आखिर देश के
गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के प्लान के मुताबिक भाजपा जहां
जितने वोटों से हालिया चुनाव हारी है, उस प्रत्येक सीट से उतने ही नए सदस्य
जोड़कर बूथ पर जीत पक्की करने की तैयारी है।
जिसके चलते चाहे देश में मोब लीचिंग्स हो, बेरोज़गारी अपने चर्म पर हो या प्राकृतिक आपदाओं में सरकार की lack of attention के चलते जाने जाती रहें लेकिन भाजपा का अगले चुनावों में और भारी जीत के साथ आना पक्का हो जाए। इन्ही कोशिशों के चलते खबर आती है कि चंदौली से भाजपा विधायक सुशील सिंह ने राजनीति की अजीबो गरीब पाठशाला शुरू कर दी है जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
असल में
इन दिनों चल रहे भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता अभियान के तहत विधायक ने
एक छात्र को भाजपा की सदस्यता दिलाकर उन्हें राजनीतिक ज्ञान दे डाला और
पार्टी का पटका पहनाकर, उनको शपथ भी दिलाई। बता दें कि पार्टी ने उत्तर
प्रदेश में 50 लाख सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा है। खास बात यह है कि
विद्यालय में पढ़ाई के बीच में विधायक सुशील सिंह ने सदस्यता अभियान चलाया।
हम आपको बताते चलें की इससे पूर्व भाजपा में शामिल हुए सदस्य अल्पेश
ठाकुर, स्वाति यादव, नीरज शेखावत जैसे नेता भाजपा के मुखर आलोचक थे, भाजपा
ने अपनी राजनितिक चतुराई के चलते अपने आलोचकों को भी पार्टी में जगह दे दी।
अमित शाह के बयान और भाजपा नेताओं के ऐसे कदम उनकी प्राथमिकताओं को साफ़
दर्शाता है। लेकिन चिंता का विषय ये है कि किसी पार्टी का काम से ज्यादा
strategy base पर सशक्तिकरण होना लोकतंत्र के लिए खतरा ना बन जाएं ? और
हिंदुस्तान अपनी पूर्ण स्वतंत्रता खोकर china जैसे said to be Republic
देशों की श्रेणी में ना खड़ा हो जाए?
पिछले कुछ वर्षों में जहाँ एक तरफ भाजपा तेज़ी से आगे बढ़ी है वहीं विपक्ष का कद दिन-ब-दिन घटता चला जा रहा है। कांग्रेस और जनता दल की बदहाली के बाद हाल ही में PTI एजेंसी से खबर आई की चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC), शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) को “कारण बताओं नोटिस” जारी करने की तैयारी में है।
चुनाव आयोग का सवाल है की पार्टियां वजह बताएं की उन्हें राष्ट्रीय पार्टी की श्रेणी में क्यों रखा जाए? बीते कुछ सालों और ख़ास कर पिछले लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाने के कारण इन पार्टियों के राष्ट्रीय पार्टी होने के दर्जे पर खतरा मंडरा रहा है।
मौजूदा वक्त में in total 8 पार्टीज को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त है जिसमे ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), बीएसपी, सीपीआई, माकपा, कांग्रेस, एनसीपी और नेशनल पीपल्स पार्टी ऑफ मेघायल शामिल हैं । पर सवाल यह है कि इन गिनी चुनी 8 पार्टीज में से भी TMC, NCP और CPI को कारण बताओ नोटिस क्यों ?
खबर का असर : एजाज को जाना पड़ा जेल, पायल व ऋषि वेकरिया की हुई जीत !
एजाज
खान का एक वीडियो वायरल होने के बाद हिंदूवादी नेता ऋषि वेकरिया ने
Molitics से बातचीत के दौरान ऐलान किया था कि अगर प्रशासन ने कोई कार्यवाही
नहीं कि तो अंतराष्ट्रीय हिन्दू परिषद के मुखिया प्रवीण तोगड़िया और रुषि
वेकरिया के नेतृत्व में CID क्राइम ब्रांच गांधीनगर के दफ्तर का घेराव किया
करेगा. ऋषि वेकरिया ही वो शख्स हैं जिन्होंने पायल रोहतगी के समर्थन में
एजाज खान के खिलाफ हल्ला बोला और एजाज को 2 दिन में गिरफ्तार करने के लिए
पुलिस को चेतवानी दी थी.
मामला
संज्ञान में आने के बाद हमने ऋषि वेकरिया से सम्पर्क साधा और इस मुद्दे पर
हम निरंतर अपडेट दे रहे थे. बता दें आपको कि बीते दिनों एजाज खान ने
सुर्खियां बटोरने के लिए एक्ट्रेस के तौर पर काम कर चूंकि पायल रोहतगी पर
एक वीडियो के ज़रिए निशाना साधा था। उसके बाद पायल रोहतगी ने एजाज खान के
खिलाफ मोर्चा खोला दिया था. जिसके बाद ऋषि वेकरिया जैसे बड़े नेता पायल के
समर्थन में आ गए थे. बढ़ते दबाव को देखते हुए गुरुवार दोपहर में एजाज खान को
मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
एक्टर एजाज
खान को मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने गिरफ्तार किया है। एजाज की Tik Tok
मामले में गिरफ्तारी हुई है। बता दें कि हाल ही में टिकटॉक 07 ग्रुप ने
तबरेज अंसारी मॉब लिंचिंग मामले में विवादित वीडियो बनाया था जिसके समर्थन
में एजाज उतर आए थे और आरोपियों का समर्थन किया था। इतना ही नहीं जिस फैजू
नाम के शख्स के खिलाफ साइबर सेल का मामला दर्ज था उसके साथ वीडियो बनाकर
पायल रोहतगी का मजाक भी उड़ाया था।
एजाज
खान का यह भी कहना था कि टिक टॉक ने जो बैन लगाया है उसे हटा दें। एजाज को
अभी भी यही लग रहा है कि फैजू और उनकी टीम ने कोई गलत काम नहीं किया।
उन्होंने सिर्फ अपना कॉन्टेंट डाला और लोगों ने उनके मुसलमान होने पर इस
तरह से बवाल किया कि देश के लिए यह वीडियो भड़काऊ है।
यह
पहली बार नहीं है जब एजाज खान पर ऐसी कार्यवाही हुई है. कहा जाता है की
एजाज खान भद्दी टिप्पणीयों के सहारे सुर्खियां बटोरने में माहिर हैं और वो
ऐसे कृत्य निरंतर करते रहते हैं. लेकिन इस बार उनको यह टिप्पणी महंगी पड़ी.
Bihar वालों ने दशक से ज्यादा इन्तेजार किया तो गाना आया ‘फिर से एक बार हो, Bihar में फलाने की Government हो’ और उसको सुनते ही जनता ने Nitish Kumar को ‘फिरसे’ कुर्सी थमा दी। सोचिए, सिर्फ Nitish Kumar Title Song गाना सुनकर ही !! हालांकि उनके तथा को भी दाद देनी होगी कि जिस गांव में अस्पताल नही है, जहां खपड़ैल विद्यालय तो है लेकिन शिक्षक नही, खड़ंजा तो बन गयी है लेकिन रास्तों पर रौशनी नहीं, हर हाथ में टच इसक्रीन फ़ोन तो है लेकिन ढंग से बिजली नही, वहां भी बाबू का गाना पहुंचा। मतलब साफ है ‘तथा शक्ति’ होनी चाहिए।
Ajitesh-Sakshi का विरोध करने वाले Anti-National क्यों नहीं? बेटी घर की इज्ज़त होती है बेटी घर की शान होती है ऐसा आप लोग हर रोज अपने गली मोहल्ले, मेट्रो और हवाई अड्डे पर सुनते होंगे। बेटी को देवी, वीरांगना न जाने क्या क्या तमगों से लैस कर समाज उनका दिन रात शोषण करता है।
बेटी ने अपनी मर्ज़ी से शादी कर लिया तो समाज के ठेकेदार, पत्रकार और नेता आहत होगये की 2019 के भारत में एक औरत कैसा अपना साथी चुन सकती है। जिस देश में हर साल प्रेमी जोड़े सिर्फ इसलिए मार दिए जाते हैं क्योंकि उन्होंने इश्क़ किया और शादी की।
मैनपुरी
में एक शादी शुदा जोड़ा मोटरसाइकिल से अपने रिश्तेदारों के घर जा रहा था
रास्ते में 3 अज्ञात लोग गाड़ी को रोकते हैं, मिर्च के पाउडर को आंखों में
फेकते हैं और पत्नी का अपहरण कर ले जाते हैं
पति नज़दीकी बिसवां थाना पहुंचता है और SHO रजनीश पाल गौतम से शिकायत करता है। न्याय देने के बयाज रजनीश और दो कॉन्स्टेबल पीड़ित पति को निर्ममता से पीटते हैं। 5 घंटे बाद महिला पुलिस थाने पहुंचती है और बताती है कि उसके साथ Gangrape हुआ है।
आला
अधिकारी हरकत में आते हैं और रजनीश समेत 2 कॉन्स्टेबल को निलंबित कर देते
हैं पीड़त जोड़ा दलित समुदाय से है इसलिए उसे न्याय मिलने की संभावना 90%
कम हो जाती है। पति ने कुरवाली थाने में गैंगरेप और लूट का मामला दर्ज़
किया और बिसवां SHO पर SC/ST के तहत मामला दर्ज़ किया गया। पुलिस की इस
हरकत पर ज़्यादा चौंकिए नहीं क्योंकि वो किसी मंगल ग्रह से नहीं आई बल्कि
इसी समाज का हिस्सा है, जो घोर जातिवादी और सांप्रदायिक है।
हमारे
देश में आज भी हजारों के तादाद में दलित उत्पीड़न होता है। मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में राम राज्य होने के दावा करते हैं, लेकिन
इस तरह की घटना से लगता है कि प्रदेश रेप राज्य की स्थापना हो चुकी है।